46 मिनट पहले
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एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु
6 अप्रैल 1930 को महात्मा गांधी ने दो मंजिला साधारण से घर सैफी विला से कुछ मीटर की दूरी पर एक मुट्ठी नमक उठाया, ये अंग्रेजों द्वारा बनाए 1882 के कठोर नमक कानून का प्रतीकात्मक उल्लंघन था, जिसने भारतीयों को समुद्र से नमक बनाने से रोक दिया था और भारी कर लगा दिया था।
गुजरात में नवसारी से 23 किमी दूर दांडी में गांधी जी के इस कार्य ने देश को उद्वेलित कर दिया और ये जगह ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ के केंद्र के रूप में इतिहास में दर्ज हो गई। सभ्यता की शुरुआत से ही लोग खाने के सामान को संसाधित-संरक्षित करने व उसकी उम्र बढ़ाने के लिए नमक प्रयोग करते आ रहे हैं।
प्राचीन रोम में तो नमक व्यापार के केंद्र में था कि सैनिकों को सैलेरियम (सैलरी) भी नमक में दी जाती थी! ऐसा इसलिए क्योंकि नमक की अवांछित रोगाणुओं को दूर रखने व वांछित सूक्ष्मजीवों को पनपने देने की क्षमता का सभ्यता को एहसास हो गया होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात, नमक फूड प्रिजर्वेटिव का काम कर सकता है।
इस रविवार को जब विश्व स्वास्थ्य दिवस था तो कई माध्यमों पर स्वास्थ्य की कई रैंकिंग दिखाई गईं, पर मुझे ये 94 साल पुरानी नमक की कहानी इसलिए याद आई क्योंकि आज नमक हर चीज में है और प्रोसेस्ड फूड में अब इसका भारी मात्रा में सेवन करते हैं। पर स्वास्थ्य के मामले में ज्यादातर लोग खाने में शकर को लेकर ज्यादा फिक्रमंद होते हैं, लेकिन नमक पर कम बात होती है।
जबकि हालिया सुबूत बताते हैं कि बहुत ज्यादा नमक, खासतौर पर प्रोसेस्ड फूड में स्वाद बेहतर करने और उसे सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाला सोडियम क्लोराइड लोगों को बीमार कर रहा है। यह हाई बीपी, हार्ट अटैक, स्ट्रोक का कारण बन सकता है। इसका संबंध पेट व कोलन के बढ़ते कैंसर की समस्या से भी है, साथ ही मेनियर बीमारी, ऑस्टियोपोरोसिस, मोटापे का भी कारण है।
सोडियम रक्त वाहिकाओं में पानी की मात्रा नियंत्रित करने से जुड़ा है, जिससे बीपी व हृदय रोग होते हैं। रक्त में जितना ज्यादा सोडियम होगा, रक्त वाहिकाओं में उतना पानी होगा। इससे रक्त पर दबाव बढ़ेगा और आगे हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ेगा।
हालांकि नमक से बीपी पर असर के मामले में कुछ लोग कम या ज्यादा सेंसेटिव हो सकते हैं। शोध बताते हैं कि नमक से हेल्दी माइक्रोब्स व फाइबर से पैदा होने वाले महत्वपूर्ण मेटाबोलाइट्स में भी गिरावट आती है। ये मेटाबोलाइट्स रक्त वाहिकाओं में सूजन या क्षति कम करते हैं और उन्हें आराम पहुंचाते हैं, जिससे बीपी कम रहता है।
एक अध्ययन में बताया कि आहार में सोडियम की प्रतिदिन एक ग्राम वृद्धि से मोटापे का खतरा 15% बढ़ जाता है। कई देश नमक का उपयोग कम करने के लिए राष्ट्रीय पहल शुरू कर रहे हैं पर सोडियम का उपयोग बढ़ ही रहा है।
कई यूरोपियन देशों में बीपी के केस कम होने और हृदय बीमारियों में कमी के मामले भी देखे गए हैं, क्योंकि वहां कई पहल शुरू हुई हैं, इसमें पैकेट पर नमक की मात्रा दर्शाते हुई पैकिंग सुधारी है और नमक को सीमित करने के लिए खाने-पीने में भी सुधार किया गया है।
आहार में नमक कम करने के प्रमाण बढ़ रहे हैं। खाने में नमक की मात्रा के प्रति सजग रहते हुए गट माइक्रोबायोम को खुराक कैसे दें? पहले तो हाई प्रोसेस्ड फूड जैसे साल्टी मीट, साल्टी ट्रीट (जैसे चिप्स, क्रेकर्स), साल्टी स्नीक्स (सॉफ्ट ड्रिंक, ब्रेड्स, कॉन्डिमेंट्स) खाना सीमित करें।
फंडा यह है कि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए नियमित रूप से निगरानी रख सकते है, पर जरूरी है कि पूरे 365 दिन भोजन में चीनी के साथ-साथ नमक पर भी नजर रखें।