Ayurveda Food Combinations: बच्‍चों को दूध में मिलाकर कभी नहीं देनी चाहिए ये 2 चीजें, भुगतना पड़ सकता है नुकसान


बच्‍चों के विकास के लिए पोषक तत्‍वों से भरपूर आहार बेहद जरूरी है। यह न केवल उन्‍हें हेल्‍दी रखता है, बल्कि कई तरह के संक्रमण और बीमारियों से भी बचाता है। इनमें से एक है दूध। दूध एक ऐसी चीज है, जिसका सेवन बच्‍चा बचपन से लेकर बड़े होने तक करता है। इसमें प्रोटीन और कैल्शियम अच्‍छी मात्रा में पाया जाता है। जिससे हड्डियां मजबूत रहती हैं और यह रेड ब्‍लड सेल्‍स को स्‍वस्‍थ रखने में भी मदद करता है। कई माता-पिता बच्‍चों को दूध के साथ कभी बिस्किट, तो कभी फल या नमकीन स्‍नैक्‍स देते हैं, ताकि दूध का स्‍वाद बदल जाए और यह टेस्‍टी लगे।

हालांकि, दूध के साथ कुछ चीजों का संयोजन परेशानी का सबब बन सकता है। गलत फूड कॉम्बिनेशन बच्‍चों में कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या पैदा करता है। आयुर्वेद चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. पुनीत कुमार द्विवेदी ने इंस्‍टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए उन दो चीजों के बारे में बताया है, जो बच्‍चों को दूध के साथ कभी नहीं देनी चाहिए। आइए जानते हैं इनके बारे में।

बच्चों को भूलकर भी दूध के साथ ना दें ये चीजें

दूध के साथ न दें नमकीन चीज

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डॉक्‍टर के अनुसार, बच्‍चों को कभी भी दूध के साथ नमकीन चीज खाने के लिए न दें। चूंकि, दूध के साथ कुछ भी नमकीन नहीं खाया जाता। इसलिए ब्रेड, खाकरा, नमकीन बिस्किट, समोसा, पराठा, खिचड़ी स्‍नैक्‍स जैसी नमकीन चीजों को दूध के साथ देने से बचें। आुयर्वेद के अनुसार, यह विरुद्ध आहार होता है। दूध में नमक मिलाने से सोडियम और लैक्‍टोज का रिएक्‍शन होता है। जो ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है और आगे चलकर हार्ट संबंधी बीमारियां को बढ़ावा भी देगा।

दूध के साथ नहीं देना चाहिए फल

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कुछ लोग बच्‍चों को स्‍कूल जाते समय दूध केला या फिर दूध सेब खिलाते हैं। लेकिन यह फूड कॉम्बिनेशन बच्‍चों के लिए अनहेल्‍दी है। मिल्‍क शेक और फ्रूट कस्‍टर्ड जैसी चीजें बच्‍चों को भूलकर भी न दें। खासतौर से दूध के साथ खट्टे फल बिल्‍कुल नहीं देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्‍योंकि खट्टे फलों में एसिड लेवल ज्‍यादा होता है, जिसकी वजह से दूध में प्रोटीन जम जाता है, जिस वजह से बच्‍चा इसे डाइजेस्ट नहीं कर पाता। इससे बच्‍चे को पेट में ऐंठन, दर्द और गैस की परेशानी हो सकती है।

विशेषज्ञ की सलाह है कि, बच्‍चों को दूध के साथ चाय या कॉफी देने से भी बचना चाहिए। इससे बच्चों के शरीर को कैफीन जैसे नुकसानदायक पदार्थों का सामना करना पड़ता है।


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